Sunday, June 21, 2009

ये मेरे हिस्से का सच है

ये मेरे हिस्से का सच है

आँखों में किरचों जैसे
कुछ ख्वाब लगे है चुभने
जीवन के इन्द्रधनुष के सारे
रंग लगे हैं उड़ने

पल भर में सब टूटे रिश्ते
किसको किसकी गरज है

ये मेरे हिस्से का सच है

वो कहते हैं नजर नजरिया मेरा
बदल गया है इतना
जो कल था जो आज है उसमे
फर्क है क्या और कितना

भेद न कोई अन्तर जाने
इतनी छोटी हुई समझ है

ये मेरे हिस्से का सच है

दिल के अंधियारे कोने में
कई राज़ छिपे हैं गहरे
मौन बना अब साथी जिनका
अश्कों के हैं पहरे

उन यादों को बिसरा दे मन
बस इतनी अरज है

ये मेरे हिस्से का सच है

Sunday, March 8, 2009

लाडो

मा मैं तेरी लाडो एक बात बताओ अम्मा
समझ न आए मुझको तुम समझाओ अम्मा

मुख मेरा देख देख कर क्या सोचा करते थे बाबा
मैं वंश नही हू उनका ये क्यो कहते थे बाबा

क्यो मेरे जनम से पहले ही मुझे मारने की तैयारी थी
क्यो साँसे देने को मुझको तुमने जान अपनी बारी थी

मैने पहली बार कदम जब तेरे जीवन मे रखा था
खोलकर अधखुले नयन ममता का अमृत चखा था

क्यों तुम खुश होकर भी अम्मा आँखों मे आँसू लाती थी
मेरे बारे मे सोच सोच कर क्यो इतना घबराती थी

बाबा की उंगली थाम कर जब मैने चलना सीखा था
क्यो अपने घर से परिचय मेरा अनजाने सरीखा था

क्यो भाई के जैसे बाहर मैं खेल नही सकती थी मा
क्यो मुझको लेकर दादी से तुम इतना डरती थी मा

क्या तुमको याद है अम्मा जब पढ़ने की ज़िद की थी मैने
कैसा था कोहराम मचा जब बढ़ने की ज़िद की थी मैने

बैठ कर खिड़की पर घंटो जो देखा करती थी अंबर मे
चिड़ियों सी उड़ाने की इच्छा जगती थी मेरे अंतर मे

एक बार जो मेरे मन मे था मैने तुमसे कह डाला था
बाहों मे लेकर अपनी तब तुमने मुझे सभाला था

बाबा को मनाने की हां कोशिश की थी तुमने आख़िर
पर क्यो इतनी मजबूर थी मा तुम मेरे सपनो की खातिर

फिर इधर उधर की बातों से मेरा ध्यान हटाने को
मा क्यो तुमसे कहा गया मुझे घर का काम सिखाने को

बस यू ही फिर धीरे धीरे बीत गई सब घड़िया
तुमने मुझको विदा किया पहना तारों की लड़िया

क्यो जाते जाते आशीष दिया अगले ज़नम जो आऊ मैं
बेटी नही बनकर बेटा तेरा भाग्य सजाऊ मैं

अपनी लाडो से मिलने एक बार कभी जो आओ अम्मा
इन सारी बातों का मतलब मुझको बतलाओ अम्मा

मा मैं तेरी लाडो एक बात बताओ अम्मा
समझ न आए मुझको तुम समझाओ अम्मा

Sunday, March 9, 2008

आधा-अधूरा

सृष्टि की सम्पूर्णता मैं, आधी क्यों पहचान मेरी।

हौसले परवान पर, फिर भी आधी उड़ान मेरी।।

आधी दुनिया, आधी जमीं, आधा फलक मेरा जहां।

मेरे हिस्से मे ही क्यों, आधा-अधूरा सब यहां।।

आधी आबादी कहकर ये दुनिया, देती मुझे आवाज है।

आधे पहर में सिमटे ज्यों, ख्वाबों के परवाज हैं।।

आधी की अधिकारिणी मैं, आधी क्यों दास्तान मेरी ।

सृष्टि की सम्पूर्णता मैं, फिर भी आधी पहचान मेरी।।

Friday, December 14, 2007

परिचय

तुम जानो या ना पहचानो, पर मुझको पाओगे हर पल.
कभी फूल कभी पंखुडियों मे, कभी पत्तियों की आभा पर.
हर दिवस निशा संध्या तुमको, मेरा भान कराएंगी.
सौ बार मिली जिस मिटटी मे, वो भूल कहाँ मुझे पाएँगी.
घोर तिमिर मे कभी निशा की साथी बन जाती हूँ मैं.
फिर प्रातः किरणों का उजास बन, सविता का संग निभाती हूँ मैं.
बादलों का रूप धरकर, नदियों का अभिसार बनी
कभी बूंद बन बरखा की प्यासी धरती पर आन गिरी.
प्रेम क्रोध कभी नफ़रत मे, समायोजित होता रूप मेरा
अंतर्मन के भावों मे, नवरस मे बंधा स्वरूप मेरा.
सागर मंथन से प्रकट हुई जो, मैं वो अमृत-हाला भी.
शिव ने जिसका पान किया, मदिरा साकी मधुशाला भी.
मैं मरी, जी उठी, फिर मरकर कितने ही जन्म लिए.
सृष्टि का विविध श्रृंगार बन न जाने कितने रूप धरे.
लघु वृत्त मे व्योम का विस्तार बनकर.समाई हू मैं ही,
विकल शून्य का झंकार बनकर
मैं कौन हू क्या परिचय मेरा, हर जन्म मे ख़ुद का मान हू मैं
मानो तो ईश्वर की एक कृति, ना मनो तो अनजान हू मैं.

Friday, November 30, 2007

करण थापर को एशियन टेलीविजन अवार्ड

जाने माने पत्रकार करण थापर को बेस्ट करंट अफेयर प्रेसेंटर के लिए एशियन टेलीविजन अवार्ड से नवाजा गया है. उन्हें यह पुरस्कार सिंगापुर मे आयोजित एक समारोह मे प्रदान किया गया.

थापर को पिछले नौ वर्षों मे तीसरी बार यह पुरस्कार दिया गया है. करण इन दिनों एक टीवी चैनल पर डेविल एडवोकेट नाम से एक प्रोग्राम का संचालन करते हैं.

Sunday, November 25, 2007

राजस्थान सरकार ने झाड़ा तस्लीमा से पल्ला

नई दिल्ली में राजस्थान सरकार की मेहमान बनीं बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए राजस्थान के गृह मंत्री ने आज कहा है कि केंद्र सरकार जल्द-से-जल्द अपनी जिम्मेदारी संभाले।

गृह राज्य मंत्री ने कहा है कि तस्लीमा के प्रति राज्य सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है। तस्लीमा पर निर्णय केंद्र सरकार को लेना है। चूंकि पिछले कुछ सालों से तस्लीमा कोलकाता में रह रहीं थीं इसलिए पश्चिम बंगाल सरकार भी इस संदर्भ में फैसला लेने का अधिकार रखती है। केंद्र सरकार अथवा पश्चिम बंगाल सरकार जल्द ही इस मामले में निर्णय करे और उन्हें मुक्त करे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक केंद्र सरकार तस्लीमा के संबंध में कोई फैसला नहीं कर लेती वो राजस्थान सरकार की मेहमान बनी रहेंगी। राजस्थान भवन में वो पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उन्हें किसी तरह का खतरा नहीं है।

दूसरी ओर बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तस्लीमा ने कहा है कि वो भारत छोड़कर कहीं नहीं जाएंगी। एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि पिछले दो दिन काफी परेशानी वाले रहे। अपने समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि अब कोलकाता ही मेरा घर है। मुझे कोलकाता और मेरे चाहने वालों की बहुत याद आ रही है। मैं जल्द ही अपने घर वापस लौट आउंगी।

उल्लेखनीय है कि तस्लीमा की वीजा अवधि बढ़ाए जाने के विरोध में गत 21 नवंबर को कोलकाता में हिंसा भड़क उठी थी जिसमें लगभग 43 लोग घायल हुए थे। हिंसा की घटना के बाद तस्लीमा को राजस्थान भेज दिया गया था। जयपुर में एक रात बिताने के बाद उन्हें दिल्ली लाया गया जहां वो राजस्थान भवन में रह रही हैं।

Wednesday, November 14, 2007

एक लाख डॉलर में बिकी हिटलर की दुनिया

नाजी तानाशाह एडोल्फ हिटलर के निजी ग्लोब को हाल ही में नीलामी के दौरान एक यहूदी उधमी ने एक लाख डॉलर की बोली लगाकर खरीद लिया।

हिटलर की दुनिया अर्थात् इस ग्लोब के खरीददार का नाम बॉब प्रिटिकन बताया जा रहा है। यह ग्लोब बरसामियान नामक पूर्व अमरीकी सैनिक अधिकारी ने बेचा है। वह दूसरे विश्व युद्ध के अंतिम दौर में जर्मनी में तैनात थे। उन्हें यह ग्लोब हिटलर के आरामगाह ईगल्स नेस्ट में मिला था।

बरसामियान के अनुसार उन्होंने कैलीफोर्निया स्थित अपने घर में इस ग्लोब को साठ साल से भी ज्यादा समय तक संभाल कर रखा। वह इस ग्लोब से हुई आय का कुछ हिस्सा समाजसेवा पर खर्च करेंगे।